Tuesday, March 11, 2008

बालिका-भ्रूण हत्या

देखो तुम ये छोटी बच्ची, है कितनी अच्छी
प्यारी-प्यारी बातें इसकी, हैं कितनी अच्छी ।

प्यार करूं कितना भी, कम ही कम लगता है
लाड़ लड़ाऊं जितना, पर मन नहीं भरता है ।

मैं सोचता रहता हूं काम इसे कितने हैं
आने वाला कल इस पर ही निर्भर है ।

नई-नई पीढ़ी को दुनिया में ये ही लाएगी
हम इसको जो देंगे दस गुना उन्हें यह देगी ।

सब सीख उन्हें ये देगी, पालेगी-पोसेगी
तकलीफ अगर होगी, तो रात-रात जागेगी ।

इसके दम से ही, हम दम भरते हैं दुनिया में
इसके दम से ही, तुम दम भरते हो दुनिया में ।

पर दुर्भाग्य हमारा देखो, अकल के कुछ अंधे हैं
दुनिया में आने से पहले ही, जो मार इसे देते हैं ।

वो भी क्या कम हैं, जो तंग इसे करते हैं
दहेज की वेदी पर, जो बलि इसकी देते हैं ।

अगर नहीं यह होगी, तो कल भोर नहीं होगी
यह संसार नहीं होगा, यह सृष्टि नहीं होगी ।

हम भी नहीं होंगे, तुम भी नहीं होगे
विश्वास मुझे है तब वो भी नहीं होगा ।

जिसके दम से हम दम लेते हैं दुनिया में ।
जिसके दम से तुम दम लेते हो दुनिया में

तब वो भी नहीं होगा-तब वो भी नहीं होगा।

3 comments:

आदर्श राठौर said...

कुमार साहब
बेहतरीन रचना है।
मान गए आपको
आगे भी लिखते रहें

Mohan said...
This comment has been removed by the author.
Mohan said...

beti bachpan se lekar aant tak bahut kuchh sahan ker sabke liye kuchh na kuchh karti hai apne liye chahati hai keval pyar ke do sabd. ghar ki ronak beti hoti hai phir bhi use garabh men hi mar dalne per tule hain kuchh raksash.aapka achhaa pryash hai.M K Bhardwaj Gurgaon.

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