यह मेरी कविताओं का छोटा संग्रह है। अपने विचार जरूर व्यक्त करें मुझे प्रसन्नता होगी।
गुरुवार, 30 जुलाई 2026
जैन-ज़ी सब-कुछ देख रही है
बुधवार, 29 जुलाई 2026
आजादी, आजादी - मुझे चाहिये आजादी
- मोटी-मोटी, भद्दी-भद्दी
रविवार, 11 मई 2025
अवसर हाथ से जाने न देंगे
यह युद्ध नहीं चाहा हमने
यह युद्ध नहीं मांगा हमने
दुर्बुद्धी खड़ा है यहाँ सामने
सब अस्त्र-शस्त्र सामान लिए
जल थल नभ कब्जे में चाहे
और पैर तले हमको चाहे है
यह चाह रहा है क्या-क्या कुछ ?
- धर्म त्याग दें हम सब अपना
आधीन इसी के हम हो जायें
मार काट फिर कर दें सबकी
जो भी इसकी राह में आए
हा-हाकार मचे धरा पर
रावण राज्य बसे धरा पर
सात शताब्दी बाद का अवसर
हाथ से इसको जाने मत देना
पृथ्वीराज को याद करो
सात बार गौरी को पकड़ा
नाक धरा पर रगड़ी उसकी
पर अभय दान भी दे डाला
फिर एक बार वो जीत गया
मारा काटा उसने सबको
तहस-नहस सब कर डाला
नयी प्रथा की नीव धरी
सदियों जिसने राज किया
हार नहीं मानी पर हमने
और धर्म नहीं त्यागा हमने
सदियों हमने युद्ध किया
वीर प्रताप से डटे रहे
वीर शिवा सा युद्ध किया
इसे हटाया अंग्रेजों ने
उन्होंने फिर राज किया
मारा काटा कितनों को
कितनों को फांसी दे डाली
निहत्थों पर गोली भी मारी
पूरी ही अति कर डाली
फिर मिल कर हमें काम किया
सैंतालीस में उनको भगा दिया
मिल जुल कर हम सब बैठ गए
संविधान दे डाला खुद को
उसको पढ़ कर हम चलते हैं
नहीं किसी से कुछ कहते हैं
हम सब इसकी रक्षा करते हैं
और आंच नहीं आने देते हैं
दुर्बुद्धी कहीं भी कुछ भी कर ले
हम आंच नहीं आने देंगे
हम प्रताप के वंशज हैं
वीर शिवा का खून खौलता
दौड़ रहा है हम सब में
धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र सजा है
हम यहीं रहेंगे, यहीं लड़ेंगे
अभिमन्यु व घटोत्कच्छ बन
वीरगति हम पा जायें, अन्यथा
अर्जुन बन दुष्टों का वद्ध करेंगे
और विजयश्री हम पा जायेंगे
रामराज्य को बसा धारा पर
हम सपना पूरा कर जायेंगे
सात शताब्दी बाद का ये अवसर
हाथ से इसको, हम जाने न देंगे
हाथ से इसको, हम जाने न देंगे
शनिवार, 29 मार्च 2025
एक नपुंसक, गीदड़ वंशज
गुरुवार, 2 जनवरी 2025
सर्दी में सूरज
सर्दी में सूरज
सर्दी का मौसम है आया
देखो मुश्किल कितनी लाया
घना कोहरा है सब ओर
घुस कर बैठ गया है चोर
चलो हम एक प्रश्न उठायें
सूरज को कटघरे में लायें
सूर्य देव अब हाजिर हों
शपथ लेकर हमें बतायें
रोज़ सवेरे काम तुम्हारा
नभ में चमको जगमग कर दो
नयी ऊर्जा सब में भर दो
ठंडी आई तुम कम दिखते हो
बोलो तुम क्या दिक़्क़त आई
क्या जाड़ा तुमको भी लगता है?
बोला सूरज —
सन-सन करती हवा है चलती
मैं भी जाड़े से मरता हूँ
चंदा को तो दिया है तुमने
मुझको भी तुम लाकर दे दो
छोटा-मोटा जैसा भी हो
मुझको एक छिंगोला दे दो
ऊन का एक छिंगोला दे दो
मोटा एक छिंगोला दे दो
नया साल
तुम भी एक विचित्र जीव हो
पूछ रहे मुझसे तुम अब
नये साल में नया है क्या
समझ मुझे पर नहीं है आता
क्यों देख नहीं पाते हो तुम
नये साल में नया है क्या
नया साल है
नयी लहर है
नयी तरंगें
नयी उमंगें
नया तरीका
नया रंग है
नया ढ़ंग है
नयी दिशा है
नयी सोच है
नया विचार है
नयी योजना
नयी सुबह है
नयी हवा है
लोग पुराने हो सकते हैं
पर सोच नयी है
नया सवेरा
तुम भी अब करबट बदलो
आँखें खोलो चश्मा बदलो
देखो आया - नया साल है
नया साल है
नया साल है
नया साल-2025
मैं ख़ुश हूँ
बहुत ख़ुश हूँ
नया साल आया
आज मेरे घर
बहुत आराम से
ठीक तरह से
बहुत ख़ुशी से
कई दिन से चाह थी
राह देखी थी मैंने
नयी आशा है
नयी उमंग है
पूरा उत्साह है
नया साल है
कल क्या होगा?
वही जो आज है
आज से बेहतर होगा
आशा के अनुकूल
उम्मीद पर खरा
चाह के अनुसार
पूरा त्रप्त करता
साल नया है
बना रहेगा हमेशा
बीस पच्चीस का
नया जवान रहेगा
बीस-पच्चीस का
हमेशा बीस-पच्चीस
सोमवार, 30 दिसंबर 2024
फिर पूछ लिया तुमने क्या हो?
फिर पूछ लिया तुमने
क्या हो
तुम्हीं कहो -
कैसे कह पाऊँगा क्या हो
गर्म ख़ून सा जोश तुम्हारा
पर्वत पर बहती धारा सी
चंचलता की मूरत हो तुम
मंद पवन की शीतलता हो
बच्चों सी भोली हो तुम
गुलाब की कोमलता हो
बुद्धि गार्गी की है तुम में
कड़क चमकती बिजली हो
चपला भी तुमको ही कहते हैं
जीवन का मतलब हो तुम
आराधना और तपस्या की थी
उन सब का ही फल हो तुम
सब बीमारी की एक दवा हो
वो राम बाण भी तुम ही हो
और बताओ क्या-क्या कह दूं
चमक आंख में तुमसे ही है
हर पल आती मेरी साँसें हो तुम
मेरे दिल की धड़कन हो तुम
जो कुछ भी है जग में मेरा
जगमग-जगमग तुमसे ही है
तुम्हीं बताओ क्या मैं बोलूँ
मुझको देखो ख़ुश हूँ कितना
जगमग-जगमग तुमसे ही हूँ
जगमग-जगमग तुमसे ही हूँ
ये कौन है?
मैं सोचता था -
ये कौन है?
क्या रिश्ता है?
कहाँ से है वो?
कब तक रहेगी
मेरे मन पर छाई
वो एक मालकिन
पूरी तरह जकड़े
मुझे, मेरी सोच
मेरे विचार, मन पर
अधिपत्य जमाये
न, न यह वो बात नहीं
आज है और कल नहीं
ये रिश्ता नहीं, संबंध है
सदियों से चला आ रहा
अनुपम अटूट संबंध
यह अलग नहीं है
मेरा ही स्वरूप है
मेरा ही बिम्ब है
मेरा सर्वांग है
जन्मों से साथ है मेरे
रहेगी जन्मों तक
मेरे साथ, हरदम
ये दूर कब है
मेरी आस में हैं
मेरी साँस में है
और रहेगी हरदम
मेरी आस में
मेरी साँस में
रात कहा तुमने मुझसे
रात कहा तुमने मुझसे
- तुम सो जाओ अब
सपनों में खो जाओ अब
सोचा मेंने -
क्या देखूँ सपना?
फिर सोचा अलग तरह से
सपना तो अपना होता है
चाहें जो वो देखे हम
मैं भी जो चाहूँ वो देखूँगा
जानोगे तुम
- क्या स्वप्न गड़ा है मैंने
देखूँ तुमको उच्च शिखर पर
कीर्तिमान सब तोड़ो तुम
अपनी अभिलाषा पूरी कर लो
आसमान में चढ़ जाओगे
पढ़-लिख कर पहचान बनाओ
जग में अपना नाम करो तुम
जगमग अपना नाम करोगे तुम
झन्डा ऊँचा लहराओ
मेरा सपना मेरा है
पर तुमको भी ये याद रहे
पूरी महनत और लगन से
तुम काम करो सारे अपने
सपना मेरा सच करना है
यह भार तुम्हारे कन्धे पर है
अब मैं सोता हूँ तुम जागो
सपना तुमको सच करना है
याद रहे तुमको हरदम
सपना तुमको सच करना है
सपना तुमको सच करना है