लोगों को चिल्लाते – आजादी, आजादी
हमें चाहिये आजादी - आजादी, आजादी
चीखा चिल्लाया था सबने - आजादी, आजादी
अश्लील हरकतें रोज करीं
थीं
गालियां भी सब को देते थे
- मोटी-मोटी, भद्दी-भद्दी
गाली में नहीं रहा था कोई
पीछे
थे लड़का-लड़की एक समान
बड़-चड़ देते थे, गंदी से गंदी
शर्म हया कुछ बची नहीं थी
एक सांस में सब को देते थे
जो कहा पुलिस से उन सब ने
वैसा ही सेना को भी बोला था
मोदी जी को भी बोला था
उसी भाषा में बोला था
वैसी ही शैली में बोला था
बिल्कुल वैसे
ही बोला था
जैसे सब को बोला था
तिल-चट्टे कहते थे –
लोकतंत्र अब नहीं बचा है ?
संविधान अब ध्वस्त हुआ है ?
मनमानी करते थे, दिखलाते थे
नियम कानून नहीं बचा है कोई
बस अब भीड़-तंत्र ही यहाँ चलेगा
तिल-चट्टे सच कहते थे?
वो सब जो चाहेंगे वो
बोलेंगे
जैसे चाहेंगे, जब चाहेंगे
बस बोलेंगे मन में आये जो भी
नाचेंगे गायेंगे,
शोर मचाएंगे
भारी सभा में हम सब
भीष्म, द्रोण बन मौन रहेंगे?
वो दुर्योधन बन जांघ
पीट कर
नाचेंगे गायेंगे, शोर मचाएंगे
लज्जित हम सब को कर जाएंगे?
जब-जब उनको देखा
रहा था
बार-बार मैं सोच रहा था
कुछ हक मेरा भी तो होगा ?
क्या नहीं मिलेगी मुझको
आजादी?
गुंडे मवालियों की हरकत से आजादी
अभद्र, अश्लील इशारों से आजादी
गंदी बोली,
गंदी शैली से आजादी
चोर-उचक्कों से आजादी
तिल-चट्टों से आजादी
मैं भी जंतर – मंतर
जाऊँगा
जोर शोर चिल्लाऊँगा - आजादी, आजादी
मुझे चाहिये आजादी, आजादी, आजादी
हम सब
को जगाना होगा
संविधान पर चलना होगा
सब को दंडित करना होगा
सबक सिखाना होगा सब को
नहीं कोई फिर ऐसे कर पाए
सब को यह बतलाना होगा
आजादी, आजादी, मुझे चाहिये आजादी
गुंडे मवालियों से आजादी
गंदी भाषा- शैली से आजादी
चोर-उचक्कों से आजादी
तिल-चट्टों
से आजादी
आजादी, आजादी
मुझे चाहिये आजादी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें