तुमने भी तो देखा होगा
जंतर – मंतर पर जमा हुए थे
कितने सारे तिल चट्टे थे
नंग धड़ंग वो नाच रहे थे
जब चाहा जिसको नोच रहे थे
धर्म, सभ्यता, संस्कार?
वो यह सब तो भूले बैठे थे
बस मांग रहे थे आजादी
सम्पूर्ण विश्व में पर जाकर देखो
नहीं मिलेगा तुमको
दूजा कोई देश जगत में
जिसमें खुल कर गाली दो
खुले मंच से भरी सभा में गाली दो
जब जी चाहे जिसको गाली दो
ऐसी वैसी जैसी चाहो गाली दो
सीएम, पीम को गाली दो
सेना के वीर जवानों को गाली दो
लोक तंत्र को खुलकर गाली दो
लाल किले पर चढ़ जाओ
सड़कों पर आओ शोर मचाओ
नंगा नाचो गाओ और नहाओ
फिर जोर जोर से चिल्लाओ
- आजादी, हमें चाहिए आजादी
इससे ज्यादा कहाँ मिलेगी आजादी
और बचा है करने को अब क्या ?
दिल में इच्छा क्या है करने की ?
लूटमार, आगजनी और खून करोगे?
तुम सब जिसको मांग रहे हो
बतलाओ कैसी होगी वो आजादी
इससे ज्यादा खुल कर और कहाँ पर
क्या-क्या, कैसे करने की सोच रहे हो?
तुम कैसी आजादी मांग रहे हो?
बतलाओ तुम क्या मांग रहे हो?
समझ गया, मैं समझ गया
सोच तुम्हारी समझ गया
देख लिया है मैंने अब तो
सीमा पार तुम्हारे आकाओं को
नाच रहे हो तुम सब कठपुतली हो
नहीं पता क्या तुमको कैसे हैं वो?
उन्हें चाहिए बर्बादी, केवल बर्बादी
तुम नाच रहे उनकी उंगली पर
वो पैसा देते हैं, तुम्हें नचाते हैं
सपनों की दुनिया में तुम्हें घुमाते
धर्म, संस्कार, सभ्यता तुम भूल गए
निकाल पड़े और यहाँ मचाते बर्बादी?
नहीं-नहीं हम नहीं मचाने देंगे तुमको
यहाँ किसी तरह की कोई भी बर्बादी
जैन-ज़ी है अकलमंद, अच्छी है
भौतिकी, रसायन ओलंपिआड जीती है
फुटबॉल, शतरंज की बाजी जीती है
क्रिकेट में डंका बजता है
स्वर्ण पदक कितने लाती है
यह नयी उमर की नयी फसल है
जोश है पूरा और उमंग है
कर्मठ हैं और लगन है
नहीं सड़क पर ये आये थे
ध्यान से देखो और समझ लो
सड़कों पर जो भी आये थे
गुंडे मवाली थे, चोर उचक्के थे
अपने आकाओं के कहने से
जैन-ज़ी की बदनामी करने को
सींग काटा बछड़ों में शामिल
वो भेष बदल कर आये थे
उन सब को पहचानो
अपराधी हैं, पथ भ्रष्ट हैं
छुपते फिरते, भड़काते हैं
गलत राह पर उकसाते हैं
उनको पकड़ो और सजा दो
जैन-ज़ी भी सब देख रही है
सब के सब होशियार बहुत हैं
कौन कहाँ कितने पानी में
जान रहे हैं, समझ रहे हैं
देश हमारा प्रगति शील है
आशा और उमंगें लेकर
नयी दिशा में दौड़ रहा है
कितने ही देशों की आँखों में
रोड़ा बन कर खटक रहा है
जैन-ज़ी सब कुछ देख रही है
बच्चा उनको नहीं समझना
उनको पूरी समझ है सब की
किस दुश्मन की आँखों में हम
कितना ज्यादा खटक रहे हैं
जान रही है, समझ रही है
भटक नहीं जाना है हमको
जान रही है, समझ रही है
जैन-ज़ी भी तो देख रही है
जान रही है, समझ रही है
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