Sunday, February 24, 2008

विमान परिचर

हवाई जहाज में उड़ता हूँ मैं
पर नहीं उड़ाता उसको मैं।
खाना सबको खिलवाता हूँ
पर नहीं उड़ाता उसको मैं।

हवाई जहाज के हर बन्दे का
ध्यान मुझे बस रहता है
उनकी हर आज्ञा मंजूर मुझे है
और नहीं उड़ाता उसको मैं।

पाइलट तो बस ध्यान मग्न है
गन्तव्य पर पहुचाना सब को है
और नहीं कुछ ध्यान में उनके
फिर भी नहीं उड़ाता उनको मैं।

सोच रहे हो -
क्या करता हूँ ?
कौन हूँ मैं ?

हवाई जहाज में काम मैं करता
विमान परिचर कहलाता हूँ मैं
इसका सब कुछ मेरा कार्य क्षेत्र है
पर नहीं उड़ाता उसको मैं।

No comments:

Post a Comment