गुरुवार, 2 जनवरी 2025

सर्दी में सूरज

 सर्दी में सूरज


सर्दी का मौसम है आया

देखो मुश्किल कितनी लाया

घना कोहरा है सब ओर

घुस कर बैठ गया है चोर


चलो हम एक प्रश्न उठायें

सूरज को कटघरे में लायें

सूर्य देव अब हाजिर हों 

शपथ लेकर हमें बतायें


रोज़ सवेरे काम तुम्हारा 

नभ में चमको जगमग कर दो

नयी ऊर्जा सब में भर दो

ठंडी आई तुम कम दिखते हो

बोलो तुम क्या दिक़्क़त आई

क्या जाड़ा तुमको भी लगता है?


बोला सूरज —

सन-सन करती हवा है चलती

मैं भी जाड़े से मरता हूँ

चंदा को तो दिया है तुमने

मुझको भी तुम लाकर दे दो

छोटा-मोटा जैसा भी हो

मुझको एक छिंगोला दे दो 

ऊन का एक छिंगोला दे दो

मोटा एक छिंगोला दे दो

नया साल


तुम भी एक विचित्र जीव हो

पूछ रहे मुझसे तुम अब

नये साल में नया है क्या


समझ मुझे पर नहीं है आता

क्यों देख नहीं पाते हो तुम

नये साल में नया है क्या


नया साल है

नयी लहर है

नयी तरंगें

नयी उमंगें

नया तरीका 

नया रंग है

नया ढ़ंग है

नयी दिशा है

नयी सोच है

नया विचार है

नयी योजना

नयी सुबह है

नयी हवा है


लोग पुराने हो सकते हैं

पर सोच नयी है 

नया सवेरा


तुम भी अब करबट बदलो

आँखें खोलो चश्मा बदलो

देखो आया - नया साल है

नया साल है

नया साल है

नया साल-2025

 

मैं ख़ुश हूँ 

बहुत ख़ुश हूँ 

नया साल आया

आज मेरे घर

बहुत आराम से

ठीक तरह से

बहुत ख़ुशी से


कई दिन से चाह थी

राह देखी थी मैंने

नयी आशा है

नयी उमंग है

पूरा उत्साह है

नया साल है


कल क्या होगा?

वही जो आज है

आज से बेहतर होगा

आशा के अनुकूल

उम्मीद पर खरा

चाह के अनुसार

पूरा त्रप्त करता 


साल नया है 

बना रहेगा हमेशा

बीस पच्चीस का

नया जवान रहेगा

बीस-पच्चीस का

हमेशा बीस-पच्चीस


सोमवार, 30 दिसंबर 2024

फिर पूछ लिया तुमने क्या हो?

 फिर पूछ लिया तुमने 

क्या हो

तुम्हीं कहो -

कैसे कह पाऊँगा क्या हो


गर्म ख़ून सा जोश तुम्हारा

पर्वत पर बहती धारा सी

चंचलता की मूरत हो तुम

मंद पवन की शीतलता हो

बच्चों सी भोली हो तुम

गुलाब की कोमलता हो

बुद्धि गार्गी की है तुम में

कड़क चमकती बिजली हो

चपला भी तुमको ही कहते हैं

जीवन का मतलब हो तुम

आराधना और तपस्या की थी

उन सब का ही फल हो तुम

सब बीमारी की एक दवा हो

वो राम बाण भी तुम ही हो 


और बताओ क्या-क्या कह दूं 

चमक आंख में तुमसे ही है 

हर पल आती मेरी साँसें हो तुम 

मेरे दिल की धड़कन हो तुम

जो कुछ भी है जग में मेरा

जगमग-जगमग तुमसे ही है


तुम्हीं बताओ क्या मैं बोलूँ

मुझको देखो ख़ुश हूँ कितना

जगमग-जगमग तुमसे ही हूँ 

जगमग-जगमग तुमसे ही हूँ 

ये कौन है?

मैं सोचता था -

ये कौन है?

क्या रिश्ता है?

कहाँ से है वो?

कब तक रहेगी 

मेरे मन पर छाई 

वो एक मालकिन 

पूरी तरह जकड़े

मुझे, मेरी सोच

मेरे विचार, मन पर

अधिपत्य जमाये


 न, न यह वो बात नहीं

आज है और कल नहीं

ये रिश्ता नहीं, संबंध है

सदियों से चला आ रहा

अनुपम अटूट संबंध


यह अलग नहीं है

मेरा ही स्वरूप है

मेरा ही बिम्ब है

मेरा सर्वांग है 

जन्मों से साथ है मेरे

रहेगी जन्मों तक

मेरे साथ, हरदम


ये दूर कब है

मेरी आस में हैं

मेरी साँस में है

और रहेगी हरदम

मेरी आस में 

मेरी साँस में 

रात कहा तुमने मुझसे

रात कहा तुमने मुझसे

  • तुम सो जाओ अब 

सपनों में खो जाओ अब


सोचा मेंने - 

क्या देखूँ सपना?


फिर सोचा अलग तरह से

सपना तो अपना होता है

चाहें जो वो देखे हम

मैं भी जो चाहूँ वो देखूँगा 


जानोगे तुम 

  - क्या स्वप्न गड़ा है मैंने


देखूँ तुमको उच्च शिखर पर

कीर्तिमान सब तोड़ो तुम

अपनी अभिलाषा पूरी कर लो 

आसमान में चढ़ जाओगे

पढ़-लिख कर पहचान बनाओ

जग में अपना नाम करो तुम

जगमग अपना नाम करोगे तुम 

झन्डा ऊँचा लहराओ 


मेरा सपना मेरा है

पर तुमको भी ये याद रहे

पूरी महनत और लगन से

तुम काम करो सारे अपने

सपना मेरा सच करना है

यह भार तुम्हारे कन्धे पर है

अब मैं सोता हूँ तुम जागो

सपना तुमको सच करना है


याद रहे तुमको हरदम

सपना तुमको सच करना है

सपना तुमको सच करना है

रात मेरे साथ

 रात मेरे साथ

एक बात हुई

मैं नींद में जाग रहा था

तेजी से कहीं जा रहा था

कि अचानक टक्कर हो गयी

एक नाजुक मासूम कली से

मैं दूर जा गिरा

दर्द ज़ोर से था

पता नहीं चोट कहाँ लगी

कपड़े झाड़े खड़ा हो गया


फिर देखा, मैं पूछ रहा था- 

मुझे क्षमा करें, आप

चोट तो नहीं लगी?

वो मुस्कुरायी और चहकी

  • हाँ लगी, पर मुझे नहीं

फिर खिलखिला कर हंसी 

और तेज़ी से भाग गयी

और भाग गया मेरा दर्द 

मैं ज़ोर से हँस पड़ा 

नींद से जाग गया

सोमवार, 16 दिसंबर 2024

 लुट गया है सब कुछ, बस बच गया है तू

तू है तो कैसे कहें कि लुट गया है सब कुछ।