सोमवार, 30 दिसंबर 2024

फिर पूछ लिया तुमने क्या हो?

 फिर पूछ लिया तुमने 

क्या हो

तुम्हीं कहो -

कैसे कह पाऊँगा क्या हो


गर्म ख़ून सा जोश तुम्हारा

पर्वत पर बहती धारा सी

चंचलता की मूरत हो तुम

मंद पवन की शीतलता हो

बच्चों सी भोली हो तुम

गुलाब की कोमलता हो

बुद्धि गार्गी की है तुम में

कड़क चमकती बिजली हो

चपला भी तुमको ही कहते हैं

जीवन का मतलब हो तुम

आराधना और तपस्या की थी

उन सब का ही फल हो तुम

सब बीमारी की एक दवा हो

वो राम बाण भी तुम ही हो 


और बताओ क्या-क्या कह दूं 

चमक आंख में तुमसे ही है 

हर पल आती मेरी साँसें हो तुम 

मेरे दिल की धड़कन हो तुम

जो कुछ भी है जग में मेरा

जगमग-जगमग तुमसे ही है


तुम्हीं बताओ क्या मैं बोलूँ

मुझको देखो ख़ुश हूँ कितना

जगमग-जगमग तुमसे ही हूँ 

जगमग-जगमग तुमसे ही हूँ 

ये कौन है?

मैं सोचता था -

ये कौन है?

क्या रिश्ता है?

कहाँ से है वो?

कब तक रहेगी 

मेरे मन पर छाई 

वो एक मालकिन 

पूरी तरह जकड़े

मुझे, मेरी सोच

मेरे विचार, मन पर

अधिपत्य जमाये


 न, न यह वो बात नहीं

आज है और कल नहीं

ये रिश्ता नहीं, संबंध है

सदियों से चला आ रहा

अनुपम अटूट संबंध


यह अलग नहीं है

मेरा ही स्वरूप है

मेरा ही बिम्ब है

मेरा सर्वांग है 

जन्मों से साथ है मेरे

रहेगी जन्मों तक

मेरे साथ, हरदम


ये दूर कब है

मेरी आस में हैं

मेरी साँस में है

और रहेगी हरदम

मेरी आस में 

मेरी साँस में 

रात कहा तुमने मुझसे

रात कहा तुमने मुझसे

  • तुम सो जाओ अब 

सपनों में खो जाओ अब


सोचा मेंने - 

क्या देखूँ सपना?


फिर सोचा अलग तरह से

सपना तो अपना होता है

चाहें जो वो देखे हम

मैं भी जो चाहूँ वो देखूँगा 


जानोगे तुम 

  - क्या स्वप्न गड़ा है मैंने


देखूँ तुमको उच्च शिखर पर

कीर्तिमान सब तोड़ो तुम

अपनी अभिलाषा पूरी कर लो 

आसमान में चढ़ जाओगे

पढ़-लिख कर पहचान बनाओ

जग में अपना नाम करो तुम

जगमग अपना नाम करोगे तुम 

झन्डा ऊँचा लहराओ 


मेरा सपना मेरा है

पर तुमको भी ये याद रहे

पूरी महनत और लगन से

तुम काम करो सारे अपने

सपना मेरा सच करना है

यह भार तुम्हारे कन्धे पर है

अब मैं सोता हूँ तुम जागो

सपना तुमको सच करना है


याद रहे तुमको हरदम

सपना तुमको सच करना है

सपना तुमको सच करना है

रात मेरे साथ

 रात मेरे साथ

एक बात हुई

मैं नींद में जाग रहा था

तेजी से कहीं जा रहा था

कि अचानक टक्कर हो गयी

एक नाजुक मासूम कली से

मैं दूर जा गिरा

दर्द ज़ोर से था

पता नहीं चोट कहाँ लगी

कपड़े झाड़े खड़ा हो गया


फिर देखा, मैं पूछ रहा था- 

मुझे क्षमा करें, आप

चोट तो नहीं लगी?

वो मुस्कुरायी और चहकी

  • हाँ लगी, पर मुझे नहीं

फिर खिलखिला कर हंसी 

और तेज़ी से भाग गयी

और भाग गया मेरा दर्द 

मैं ज़ोर से हँस पड़ा 

नींद से जाग गया

सोमवार, 16 दिसंबर 2024

 लुट गया है सब कुछ, बस बच गया है तू

तू है तो कैसे कहें कि लुट गया है सब कुछ। 

शनिवार, 7 दिसंबर 2024

एक और कली


कली एक और 

खिल गई है 

बाग में मेरे


छोटी है, सुंदर है 

रोती है हँसती है, 

सोती है जगती है

दूध पीती है सो जाती है 

हरदम मस्त रहती है


अभी छोटी है 

पर अपनी पहचान है 

इसकी अपनी हस्ती है 

अपना व्यक्तित्व है 

अपनी समझ है


नासमझ मत समझना 

ठीक से समझो इसे 

देखो चतुर है कितनी 


किलकारी से, चीख से 

रो कर, हंस कर

अपनी हर बात 

बता देती है अपनी माँ को 

हर बार, एक दम साफ़ 


फिर करा लेती है 

सब कुछ जो भी चाहती है 

दिन रात जब चाहती है 

अपनी माँ से कराती है


बच्ची छोटी है 

अच्छी है प्यारी है

सबकी दुलारी है

मेरे बाग की नयी कली


कितनी प्यारी है 

मेरे बाग की नयी कली

रिश्ते

रिश्ते रिसते हैं तो घर भी बरबाद करते हैं। 

वरना वो पूरे कुनबे को भी आबाद करते हैं 


रिश्ते रिसते हैं तो घर बरबाद करते हैं। 

वरना पूरे कुनबे को वो आबाद करते हैं 

तुम क्या हो

तुम पूछते हो मुझसे कि तुम क्या हो

मेरी उम्र भर की दुआओं का असर हो


वो ज़िन्दगी ही असल ज़िन्दगी होगी 

जो तेरी ज़ुल्फ़ों की छाँव में बसर हो


प्यार मुहब्बत हो, मिल-बांट कर रहें 

डूंड रहा हूँ मैं कोई ऐसा भी शहर हो


वक़्त कट जाये और पता भी न चले

हमसफ़र कोई ऐसा हो तो सफर हो


तुम तो कायनात का नायाब नगीना हो

अब तुम्हीं कहो कैसे मुझको सबर हो


उस ज़िन्दगी को ज़िन्दगी कैसे कहें

जो तेरी ज़ुल्फ़ की छाँव में न बसर हो