तुमने भी तो देखा होगा
जंतर – मंतर पर बैठ गए थे
मादाओं के आड़- में पीछे
कुछ थोड़े से तिल चट्टे थे
कुछ गुंडे थे, अपराधी थे
कुछ बलात्कारी, हत्यारे थे
अशलील इशारे करते थे
खुद को जैन-ज़ी बतलाते थे
पर वो गाली सब को देते थे
भाषा-शैली बतलाती थी
यही सभ्यता है इनकी
यही संस्कार पाया है
जैन-ज़ी के ये लोग नहीं हैं
जैन-ज़ी से परिचय है मेरा
वो मेरे घर में भी रहती है
बरसों पहले मैं भी जैन-ज़ी था
अब मेरा बच्चा है उसमें
फिर बच्चे का बच्चा होगा
जैन-ज़ी तो अकलमंद है, अच्छी है
भौतिकी, रसायन ओलंपिआड जीती है
फुटबॉल, शतरंज की बाजी जीती है
क्रिकेट में डंका बजता है
स्वर्ण पदक कितने लाती है
यह नयी उमर की नयी फसल है
जोश है पूरा और उमंग है
कर्मठ हैं और लगन है
नहीं सड़क पर ये आये थे
ध्यान से देखो और समझ लो
सड़कों पर जो भीड़ में आये थे
गुंडे मवाली थे, चोर उचक्के थे
मादाओं के आड़- में पीछे
कुछ थोड़े से तिल चट्टे थे
अपने आकाओं के कहने से
जैन-ज़ी की बदनामी करने को
सींग काटा बछड़ों में शामिल
वो सब भेष बदल कर आये थे
उन सब को पहचानो
अपराधी हैं, पथ भ्रष्ट हैं
छुपते फिरते, भड़काते हैं
गलत राह पर उकसाते हैं
उनको पकड़ो और सजा दो
जैन-ज़ी में सब देख रहे हैं
कौन कहाँ कितने पानी में
जान रहे हैं, समझ रहे हैं
देश हमारा प्रगति शील है
आशा और उमंगें लेकर
नयी दिशा में दौड़ रहा है
कितने ही देशों की आँखों में
रोड़ा बन कर खटक रहा है
जैन-ज़ी सब कुछ देख रही है
बच्चा उनको नहीं समझना
उनको पूरी समझ है सब की
किस दुश्मन की आँखों में हम
कितना ज्यादा खटक रहे हैं
जान रही है, समझ रही है
भटक नहीं जाना है हमको
जान रही है, समझ रही है
जैन-ज़ी सब को देख रही है
जान रही है, समझ रही है