सोमवार, 30 दिसंबर 2024

रात मेरे साथ

 रात मेरे साथ

एक बात हुई

मैं नींद में जाग रहा था

तेजी से कहीं जा रहा था

कि अचानक टक्कर हो गयी

एक नाजुक मासूम कली से

मैं दूर जा गिरा

दर्द ज़ोर से था

पता नहीं चोट कहाँ लगी

कपड़े झाड़े खड़ा हो गया


फिर देखा, मैं पूछ रहा था- 

मुझे क्षमा करें, आप

चोट तो नहीं लगी?

वो मुस्कुरायी और चहकी

  • हाँ लगी, पर मुझे नहीं

फिर खिलखिला कर हंसी 

और तेज़ी से भाग गयी

और भाग गया मेरा दर्द 

मैं ज़ोर से हँस पड़ा 

नींद से जाग गया

सोमवार, 16 दिसंबर 2024

 लुट गया है सब कुछ, बस बच गया है तू

तू है तो कैसे कहें कि लुट गया है सब कुछ। 

शनिवार, 7 दिसंबर 2024

एक और कली


कली एक और 

खिल गई है 

बाग में मेरे


छोटी है, सुंदर है 

रोती है हँसती है, 

सोती है जगती है

दूध पीती है सो जाती है 

हरदम मस्त रहती है


अभी छोटी है 

पर अपनी पहचान है 

इसकी अपनी हस्ती है 

अपना व्यक्तित्व है 

अपनी समझ है


नासमझ मत समझना 

ठीक से समझो इसे 

देखो चतुर है कितनी 


किलकारी से, चीख से 

रो कर, हंस कर

अपनी हर बात 

बता देती है अपनी माँ को 

हर बार, एक दम साफ़ 


फिर करा लेती है 

सब कुछ जो भी चाहती है 

दिन रात जब चाहती है 

अपनी माँ से कराती है


बच्ची छोटी है 

अच्छी है प्यारी है

सबकी दुलारी है

मेरे बाग की नयी कली


कितनी प्यारी है 

मेरे बाग की नयी कली