गुरुवार, 22 नवंबर 2018

क्या गम है?

तुम ही तो थे कि कहते थे, तुम हो तो क्या गम है?
तुम ही अब कहते हो, कि तुम हो ये ही तो गम है!

बुधवार, 14 नवंबर 2018

पत्थर का है तो हुआ करे, दिल तो है
बदनसीब हैं जिन्हें ये भी मयस्सर नहीं

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पत्थर का ही सही मगर दिल तो है
वो कितने हैं जिन्हें ये भी नसीब नहीं

शनिवार, 13 अक्टूबर 2018

क्या मेरा दर्द है


मुझको तो मर्ज़ है, और मर्ज़ का पूरा दर्द है
किसी को तवक्को ही नहीं, मेरा क्या दर्द है


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विश्व हॉस्पिस व पॉलियेटिव देखरेख दिवस पर लिखी
Written on the World Hospice & Palliative Care Day