हर्ष कुमार की कविताएं
यह मेरी कविताओं का छोटा संग्रह है। अपने विचार जरूर व्यक्त करें मुझे प्रसन्नता होगी।
गुरुवार, 22 नवंबर 2018
क्या गम है?
तुम ही तो थे कि कहते थे, तुम हो तो क्या गम है?
तुम ही अब कहते हो, कि तुम हो ये ही तो गम है!
बुधवार, 14 नवंबर 2018
पत्थर का है तो हुआ करे, दिल तो है
बदनसीब हैं जिन्हें ये भी मयस्सर नहीं
----------
पत्थर का ही सही मगर दिल तो है
वो कितने हैं जिन्हें ये भी नसीब नहीं
शनिवार, 13 अक्टूबर 2018
क्या मेरा दर्द है
मुझको तो मर्ज़ है, और मर्ज़ का पूरा दर्द है
किसी को तवक्को ही नहीं, मेरा क्या दर्द है
---
विश्व हॉस्पिस व पॉलियेटिव देखरेख दिवस पर लिखी
Written on the World Hospice & Palliative Care Day
नई पोस्ट
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ