गुरुवार, 19 नवंबर 2009

आदमी

सुबह से शाम तक
कोल्हू के बैल सा पिसता
आदमी, चला जाता है
तपती रेत पर दोपहर को
धूप में, अपने पके बाल लिये
अपना खून पसीना एक करने।

अपनी जी तोड़ मेहनत के बाद भी
जीता है निस्तेज, संध्या के सूर्य सा

पर ऐसे नहीं
पहले वह मरता है,
फिर जीता है।

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

पहले वह मरता है,
फिर जीता है।

एकदम सही

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